रुधौली: बुढ़िया समय माता मंदिर में श्रीराम कथा का भव्य शुभारंभ

लखनऊ विवि के प्रो. डॉ. विष्णुकांत शुक्ल ने बताई राम नाम की महिमा, भव्य कलश यात्रा में उमड़े श्रद्धालु



परसा तिवारी, रुधौली (बस्ती): क्षेत्र के प्रसिद्ध बुढ़िया समय माता मंदिर, परसा तिवारी में गुरुवार को श्रीराम कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। प्रथम दिवस भव्य कलश यात्रा और कथा व्यास के ओजस्वी विचारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।


मुख्य आकर्षण और कार्यक्रम की शुरुआत


कथा के पहले दिन एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यात्रा के उपरांत विद्वान पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया गया। कथा व्यास और उनके सहयोगी आचार्यों का स्वागत मुख्य यजमान ज्योतिषाचार्य आदर्श तिवारी और नीतीश पाण्डेय (उर्फ मनु पण्डित) द्वारा किया गया।



कथा व्यास डॉ. विष्णुकांत शुक्ल के अमृत वचन


लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और कथा व्यास डॉ. विष्णुकांत शुक्ल ने श्रीराम कथा के प्रथम प्रसंग में 'राम नाम' की महिमा का अद्भुत वर्णन किया। उनके संबोधन के मुख्य अंश इस प्रकार रहे:


  1. राम नाम अविनाशी है: संसार की परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, लेकिन राम नाम की महिमा सदा अटल रहती है। यह सृष्टि के अस्तित्व का आधार है।

  2. सृष्टि की ऊर्जा: सूर्य, चंद्रमा, अग्नि और वायु में जो ऊर्जा है, वह राम नाम से ही संचालित होती है। भगवान शिव स्वयं निरंतर राम नाम का जप करते हैं।

  3. श्रद्धा और विश्वास: भगवान शिव और माता पार्वती के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब जीवन से अभिमान समाप्त होता है, तभी श्रद्धा जाग्रत होती है।

  4. संयम और मर्यादा: शब्द को ब्रह्म माना गया है, अतः मनुष्य को शब्दों का प्रयोग सदैव संयम और मर्यादा के साथ करना चाहिए।

 

डॉ. शुक्ल ने श्रद्धालुओं से आह्वान करते हुए कहा, “श्रीराम के चित्र के साथ उनके चरित्र को तथा चरणों के साथ उनके आचरण को भी अपनाने की आवश्यकता है।”


जीवन के हर संस्कार में 'राम'


कथा व्यास ने कहा कि जन्म के सोहर से लेकर, विवाह के मांगलिक गीतों और जीवन की अंतिम यात्रा तक, हर संस्कार में राम नाम की उपस्थिति अनिवार्य है। राम सबमें हैं और राम में ही शिव हैं।


व्यवस्था एवं सक्रिय सहयोग


इस धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में निम्नलिखित श्रद्धालु और कार्यकर्ता सक्रिय रूप से लगे हुए हैं: रामचन्द्र तिवारी, अरविंद त्रिपाठी, कवि चन्द्र यादव, आशीष चौधरी, रजनीश मिश्र, योगेश मिश्र, नीरज जायसवाल, रामकुमार चौधरी, आदित्य पाण्डेय, भोलानाथ चौधरी, पंकज त्रिपाठी एवं अन्य।